Rambriksh Bahadurpuri 30 Apr 2026 कविताएँ समाजिक #रामवृक्ष बहादुरपुरी#अम्बेडकरनगर पोइट्री साहित्यिक मंच #रामवृक्ष बहादुरपुरी#लगता है इंसान होना पाप से है कम नहीं 4149 0 Hindi :: हिंदी
लगता है इंसान होना पाप से है कम नहीं
तार है इंसानियत इंसान को है गम नहीं
क्या सही है क्या ग़लत न तौलता इमान को
मार कर इंसानियत को पालता शैतान को
देख कर दुर्दिन किसी का आंखें होती नम नहीं
लगता है इंसान होना पाप से है कम नहीं।
इंसान ने इंसान को मजबूर इतना कर दिया
जीतू मुंडा खोद शव कंकाल लाकर रख दिया
आसान इतना है नहीं इंसान से लड़ना यहाॅं
आसान है लाचार को सहते हुए मरना यहाॅं
प्रमाण गर इतना जरुरी फिर व्यवस्था क्यों नहीं
लगता है इंसान होना पाप से है कम नहीं।
क्या पड़ा किसको किसी के शिक्षा व अधिकार से
दूर होती बस मुसीबत भाषण के बौछार से
वंचित शोषित लुट रहे हैं ऐसे अत्याचार से
न छिपी है बात कोई अजनबी सरकार से
हर कोई लाचार इतना दिखता है दमखम नहीं
लगता है इंसान होना पाप से है कम नहीं।
रामवृक्ष बहादुरपुरी
अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...