Rambriksh Bahadurpuri 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक #ambedkarnagar poetry#Rambriksh kavita#kanchankaya kavita#samajik kavita#samjik kavita Rambriksh#kanchankaya rambriksh 47824 0 Hindi :: हिंदी
कविता-कंचनकाया सुंदर कहूं कि मायावी काया यह बात समझ मैं ना पाया , सुंदरता तो मन में होती है माया होती कंचन काया | क्या समझ ना पायी थी सीता कंचन काया की वह माया , या गुण ही कंचन की है ऐसा जिससे कोई बच ना पाया | ऋषि मुनि को यह किया विखंडित मन को किसके यह ना भाया, रूप आशंकित बड़ा अचंभित समझ इसे ना कोई पाया | राजा हो या हो शासक है कौन जिसे वह छला नहीं , अंग अंग में रूप रंग में है कौन सी ऐसी कला नहीं | रीत पुरानी नीति पुरानी बीते समय की बनी कहानी , पर आज बनाए भी बैठी है कंचन काया रूप सुहानी | क्यों खिंच जाता है हर कोई रूप देखकर अंग सुनहरी मधुर मधुर मुस्कान जिज्ञासा भर देती है भाव शिकारी | माया की यह नई कहानी भरेगी जज्बा जोश जवानी , हर राम भगेगा पीछे इसके तीर तानकर खींचा तानी | माया बन गई मन की छाया चित् चितवन में लोभ समाया , भाव स्वभाव की लक्ष्मण रेखा बांध कब तलक किसको पाया | हर युग की हर बात सही है बस सोंच सोंच की बात रही है , घर घर रावण घर-घर राम भले ही त्रेता आज नहीं| रचनाकार-रामबृक्ष, अम्बेडकरनगर
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...