संदीप कुमार सिंह 08 Jun 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 23716 0 Hindi :: हिंदी
कल की शाम बड़ी रंगीन थी, नजरों में प्यार की किरण थी। नज़र बार_बार जिधर जाती, कुआँ का दृश्य मनोरम लगता। चारों और हरियाली छाई थी, बीच में कुआँ हंस रहा था। कुआँ की पानी खूब शीतल थी, गोला कार सिर बहुत सजा था। और चबूतरा काफी सख्त था, उस पे बैठी नाजनीन थी। नाजनीन कपड़ा धो रही थी, चेहरे पर गुलाबी नूर था। सारी अदाएं कमाल की थी, ऊपर से शाम भी गुलाबी थी। एक आशिक बैठा देख रहा था, आशकी की हवा चल रही थी। उसकी नज़र ने मेरी नज़र से, एक रंगीन बात कर ली थी। दोनों के दिल में फूल खिले थे, दोनों मिलने को अब बेचैन थे। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....