Rajendra Prasad Gupta 21 Jun 2023 कविताएँ समाजिक आँखों की कहानी 34572 0 Hindi :: हिंदी
जीवन की कठिनाइयों से झूझते हम, दिल में छुपी आँसुओं को समेटते हम। जो ना कह सके वो आँखें कह गईं, हर बात को सुनते हमारी ये आँखें ही। गम की लहरों में जीने का दम हममें, संघर्ष की मारों को छलकाती ये आँखें। मुसीबतों का रोम-रोम जानती हैं ये, खुशी-गम सब को सुनाती हैं ये आँखें। रूठे दिल को हंसा देती हैं ये आँखें, मान जाती हैं हमको इंतज़ार में ये आँखें। अगर आँखें न होतीं तो कैसे जीते हम, एक बेज़ुबान कहानी बनी हुई हमारी आँखें। अपनी आँखों से कह गईं हमारी कहानी, प्यार, ख़ुशी, दर्द, सब कहती हैं ये आँखें। जब तक जीवन है, तब तक हम सब हैं, जीने की ज़िम्मेदारी उठाती हैं ये आँखें।
I take pride in writing articles on all the problems related to the society....