MD SHAYEED ALAM 20 Nov 2025 कविताएँ समाजिक खुशियों से परहेज 5719 0 Hindi :: हिंदी
खुशियों से है परहेज हमें, इसलिए हमने गमों को दोस्त बनाया। कि भीड़ में जाना पसंद नहीं हमें, इसलिए तनहाइयों को ही हमसफर बनाया। तुझसे कोई शिकायत नहीं है ऐ जिंदगी, बेशक तूने हर मोड़ पर है हमें गिराया। लेकिन फिर भी शुक्रगुजार हूं मैं तेरा, तूने गिर के फिर संभलना भी तो है सिखाया।।