Raj Ashok 01 May 2023 कविताएँ अन्य जय भवानी 30064 0 Hindi :: हिंदी
मैदान मे अगर हम, खडे़ भी हो गए है ।
तो जरा घ्यान से
इन बहती हुई हवाओ को सुनना
हमारे नाम का शौर ही
ये बता देगा ।
कि इस खेल के नतीजे
क्या होगे ?
बेकार,
हवा मे यों सिक्कें उछाल कर
किसी अन्तिम निर्णय का
इन्तजार मत करना।
जो खेल हम से शुरु होते है।
उनके ,नतीजे भी
हम ,तय करते है।
ओर कोई नहीं ।
याद रखना ।
जीतने का जुनून हमें,
विरासतों से मिलता आया है
जाके ,देखों,
उन रण के मेदोनों को
आज भी, हमारे पुरखो का वहा
बहता खून बोल रहा है।
जय, भवानी