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कावळ्यांचा पडलाय मोत्यांवर डाव

Samir Lande 08 Oct 2023 कविताएँ समाजिक Samir Lande समीर लांडे कावळ्यांचा डाव 38673 0 Other :: Other

सांडली पेणातली शाई मला भरता येत नाही,
सरपंचा विषय काही बोलता येत नाही.
गावात कामे नाही होत आता तस्तीची ,
गा*त शब्द मोडतो यांचा मस्तीची.
गावकरी काय, भरती सभा जणू किडे पडले चौकात,
गळतय गरीबाच घर भर पावसात.
गाव गेलं भो*त , अन नोटा चालल्यात खिशात.
गरज गावाला नाय, करा तुमच्या बुध्दी चां विकास.
तोंड पाहून काम, जे यांची चाटत राहतील.
विरोधाच्या सही साठी पैसे मग.
पंचायतीच्या हातात दील गावच नाव,
कावळ्यांचा पडलाय मोत्यांवर डाव...
 कवी :- समीर लांडे

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