Pratibha Khadekar 18 Mar 2024 कविताएँ बाल-साहित्य Writer Pratibha khadekar 32391 0 Hindi :: हिंदी
काश हम चिडिया होते
कोई बंधन न होता,
मन चाहता वो करते,
कोई रोक टोक न होता,
कभी इस डाली, कभी उस डाली,
जहा चाहत हो वही मोह फैलाते,
कोई चीख चिल्लाने वाला न होता,
काश हम चिडिया होते
कोई बंधन न होता,
मन चाहत को अपनी
पंखो से छू लेते,
मन जितना चाहता उतनी
उडान भर लेते,
कोई दाटे खुखारे आऐसा कोई
पल न होता,
काश हम चिडिया होते ,
न फोन न आय फोन न क्रेडिट
न किसी चीज की आवश्यकता होती,
ए खुशहाल जिंदगी आसमान छू रही होती,
मन चाहा घोसला बनाते
कभी हार ना होती,
न कुछ तुटने का डर न खोने का न कुछ पीछे छुटने का,
काश हम चिडिया होते,,
,,,,,,,,,,,,,,,प्रतिभा खडेकार
7517947668