Rambriksh Bahadurpuri 03 Feb 2025 कविताएँ समाजिक #Rambriksh Bahadurpuri#Ambedkar Nagar poetry # Dard per kavita #Peeda per kavita #Samajik Kavita #Desh per kavita 29875 0 Hindi :: हिंदी
कैसे मैं गीत गाऊॅं! छ्न्द करुणा का लिए मैं गीत गाऊॅं श्रृंगार या फिर हास्य से कैसे सजाऊॅं यह देखते बनता न हालत देश का है कहीं अच्छा कफन इससे बताऊॅं, छ्न्द करुणा का लिए मैं गीत गाऊॅं। देश है मानों बॅंटा टुकड़ों में ऐसे नेत्र से आंसू पड़े बिखरे हैं जैसे देश हिन्दुस्तान की पहचान है यह गीत खुशियों का भला मैं कैसे गाऊॅं, छ्न्द करुणा का लिए मैं गीत गाऊॅं। उम्र भी अनुभव का दस्तावेज है जीवन पीड़ा से सजा एक सेज है वस्त्र है काफी नहीं तन ढक सके फक्र है इस देश पर कैसे सुनाऊॅं, छ्न्द करुणा का लिए मैं गीत गाऊॅं। क्यों दशा हालात का मारा हुआ लाचार बेबस जीवन है हारा हुआ पेट भी भरता या भरता है नहीं यह बात इतनी है नहीं जिसको छिपाऊॅं, छ्न्द करुणा का लिए मैं गीत गाऊॅं। आज हम मजबूत चाहे जो समझ लें अपनें में अपने से चाहे जो सुलझ लें हम असल कमजोर भी उतना अभी हैं कमजोरियाॅं किसको कहाॅं कैसे गिनाऊॅं, छ्न्द करुणा का लिए मैं गीत गाऊॅं। रचनाकार रामवृक्ष बहादुरपुरी अम्बेडकरनगर उत्तर प्रदेश 9721244478
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...