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कलम की गूॅंज

Rambriksh Bahadurpuri 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक #Rambriksh Bahadurpuri kavita #Rambriksh Bahadurpuri Ambedkar Nagar #kalam per kavita 37676 0 Hindi :: हिंदी

कविता - कलम की गूंज 

कलम की गर्जना
               कड़कती रहेगी
कलमों की कीमत
               रही है रहेगी
बनी स्याही, आंसू
               गिरी कागज़ों पर
वही दुःख की दरिया
               समन्दर लिखेगी। 

कभी दीन दुखियों की
               इतिहास लिखकर
कभी फुलझड़ी सी
               पन्नों पर झड़कर
सुख दुःख की बनकर
               संगम   रहेगी। 

तलवार बरछी की
               ताकत रही है
शोषित वंचितों की
               राहत रही है 
विचारक कवि लेखक की
               हथियार बन कर 
महिमा कलम की
               गूंजती  रहेगी। 

बहादुरपुरी की कलम
               जब चलेगी
कलमों की कीमत
               रही है रहेगी। 
कभी कोई इसको
               झुकाना भी चाहे
दबाना भी चाहे
               मिटाना भी चाहे
बन तोप शोला
               गरजती रहेगी। 


रचनाकार -रामबृक्ष बहादुरपुरी अम्बेडकरनगर यू पी 




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