Raj Ashok 05 Oct 2025 कविताएँ हास्य-व्यंग ज़िन्दगी हमारी 9711 0 Hindi :: हिंदी
मिल ग ऐ हम,, मिलना मुकद्दर था ।। यही वो शब्द है।। जिसने मेरे प्यार को अधुरा रखा हैं ।। सचमुच, चाहत की बैशाखियों से ।। अब ओर नहीं चल सकता में ,,....।। दुनिया , हकीकत में कुछ और बनाती है । मुहोबत कुछ और सिखाती है ।। मर जाए ज़िद में , अरे नहीं.......।। दिल से मुहोबत ही बदल देंगे ........।। एक चहरे से क्या......।। हजारों लाखों चहरे हम से कहेंगे।। तुम मुहोबत हो जान हमारी.... ये बाजी यां है । वक्त और रंजीश की खेल ना है । तो मजे से खेलिए , हर खेल......।। दिल पे मत लिजिए........।। कहती हैं।। ज़िन्दगी हमारी....