PRIYA TIWARI 23 Jan 2026 कविताएँ दुःखद 9227 1 5 Hindi :: हिंदी
कहानी तो है, पर हमारी नहीं,
लिखा गया है, पर हमारे बारे में नहीं,
बताया गया है, पर हमारे बारे में नहीं,
समझाया गया है, पर हमसे जुड़ा नहीं।
हम तो खुद में ही एक कहानी हो गए हैं,
न जाने क्यों, दूसरों की जुबानी हो गए हैं।
किसी के दिल के खजाना थे हम,
अब उसी के दिल में राज़ बनके दफन हो गए हैं।
दफन इस कदर हो गए हैं,
कि फिर से उभरने की हिम्मत नहीं,
जीना छोड़ इस कदर गए हैं,
कि फिर से जिंदगी की उम्मीद नहीं।
अब तो हम किसी की जिंदगी की किताब की,
वो कहानी हो गए हैं,
जिसका न कोई आरंभ है और न अंत।
(लेखिका-प्रिया तिवारी)
4 months ago