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कभी मिलेंगी फुरसत तो जिक्र-ए-इज़हार करूंगा

Pravin Chaubey 28 Apr 2025 कविताएँ प्यार-महोब्बत #कविता#शायरी #पोयम# 32499 0 Hindi :: हिंदी

कभी मिलेंगी फुरसत तो जिक्र-ए-इज़हार करूंगा 

कभी मिलेंगी फुर्सत तो जिक्र-ए-इज़हार करूंगा,
तेरी खामोश निगाहों में अपना प्यार भर दूंगा।
कुछ तेरा कहा, कुछ मेरा सुना,
इस दिल की दास्तां को खुलकर बयान करूंगा।

तेरे बीते मौसमों की ठंडी हवा छूकर,
अपने जख़्मों के किस्से भी संवार दूंगा।
तेरी हँसी के पीछे जो छुपा है ग़म,
उसको भी अपने अश्कों से हल्का कर दूंगा।

कभी तेरे ख़्वाबों में उतर कर देखूंगा,
तेरे हर अधूरे पल को मुकम्मल कर दूंगा।
कुछ तुझे सुनाऊंगा तेरी ही धड़कनों की जुबान में,
कुछ अपने टूटे अरमानों की भी चर्चा करूँगा।

जब फुर्सत की चुप्पियाँ तन्हा बैठेंगी हमारे साथ,
तेरी उंगलियों को थाम कर हर साजिश-ए-फ़रियाद करूँगा।
कुछ तेरे लिए, कुछ अपने लिए,
उस एक मुलाक़ात में सारी उम्र का प्यार कर दूंगा।

                -  प्रवीण चौबे

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