संतोष सिंह क्षात्र 30 Mar 2023 कविताएँ देश-प्रेम #क्षात्र_लेखनी© #काव्य_विथिका #kavishala #अधर #देश #समय_का_प्रणय #प्रेमिल #ठसक #प्रवासी #दिल_रोता_है #काव्यांश #हिन्दी_शब्द #कवि_सम्मेलन #स्वरचित #आतंकवाद #मजहबी_बहसीपन #बिच्छू_से_दोस्ती_ठीक_नहीं @Drkumarvishwas #भगतसिंह #सुभाषबाबू #दंगा #हत्या #महापुरूषों_का_अपमान #दबे_पांव_आये_आतंकी #गुलामी_की_आहट #शब्द_हिंदी @SantoshKshatra #trrism #Poem #Attention #India #Jayhind #VandeMatram #Kashmir 59260 0 Hindi :: हिंदी
कब-तक चलेगा ऐसा, पसारे हाथ कब-तक गिड़गिड़ाओगे तुम क्या स्वयं को मुर्दा बना दिया है कहां-कहां शरण पाओगे कब-तक भीख सहायता की मांगोगे तुम। कब-तक भागोगे तुम।। मरना निश्चित है एक दिन, जरा विवेकानंद को पढ़ लेते, इस मरी काया के अंदर, थोड़ा शौर्य तो गढ़ लेते, कब-तक भीख सहायता की मांगोगे तुम। कब-तक भागोगे तुम।। कायर बन कहां-कहां भटकोगे राह चलते कब-तक अटकोगे, याद लक्ष्मीबाई का कर लेते मानस पटल पर शिवाजी को रख लेते, कब-तक भीख सहायता की मांगोगे तुम। कब-तक भागोगे तुम।। ऐतिहासिक गद्दारों के भय से क्या महाराणा प्रताप को भुलाओगे तुम कब भरतवंश की काया में आओगे तुम इसराइल के कदमों को पहचानोगे तुम कब-तक भीख सहायता की मांगोगे तुम। कब-तक भागोगे तुम।। दिवास्वप्न से बाहर झांको अतीत के पन्नों पर स्वयं को आंको, नंगी आधुनिकता के किचड़ पोछों, झलकारी बाई - पद्मावती सा सोचो कब-तक भीख सहायता की मांगोगे तुम। कब-तक भागोगे तुम।। दूसरों के आसरे कब-तक सम्मान खोओगे तुम क्या भाग्य भरोसे हर कदम रोओगे तुम धर्मनिरपेक्ष के दोहरेपन को बाहर कब लाओगे तुम गुरू गोविन्द सा सम्बल कब प्रकटाओगे तुम कब-तक भीख सहायता की मांगोगे तुम। कब-तक भागोगे तुम।। ____________---------______________ #क्षात्र_लेखनी© @SantoshKshatra