Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

जिम्मेदारीयाँ -अबोध मन क्या करे जमाने मे

Raj Ashok 28 May 2023 कविताएँ समाजिक जिम्मेदारी 31734 0 Hindi :: हिंदी

जिम्मेदारियाँ  बहुत है । 
अबोध मन क्या करे ,जमाने मे। 
चुनौतियों के   तरक्ष ,
अक्सर दिल मे चुभते है। 
 उलझनों मे उलझे,इस बचेन मन को 
अब  लोगों का ,मशवरा भी। 
 मशकरो का कोई ,जोक लगता  है ।
चाहत है ये दिल  की
के खुद पे खुब हंसे ... 
पर  मेरे शब्दों की बंदिश ने
 मेरी खिलखिलाहट  सी
 हंसी को , गुलाम बना रखा है। 
चहरे के हाव -भाव से ही
 अक्सर आज-कल की
दोस्ती निभाई जाती है। 
योहि कभी खालीपन मे, 
जरा सा, सोचते  है , के काश
आज की सभ्यता , ये हमें जरा से
संसकार  बता दे, 
हार, जीत का फर्क सिखा दे ।
तो जीवन क्या आसान होगा ।

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: