akhilesh Shrivastava 05 Jul 2024 कविताएँ समाजिक जीवन में आदमी धन संपत्ति जोड़ने में लगा रहता है जबकि मौत हो जाने पर सब यहीं छूट जाता है 45541 0 Hindi :: हिंदी
*कविता*
*जाना खाली हाथ*
मुठ्ठी बांध कर आये हैं
जाना खाली हाथ
संग नहीं कुछ जाएगा
छूट जाएगा साथ।
जिंदगी भर हम सब यहां
करते हैं खूब काम
धन संपत्ति जोड़ने
नहीं करते आराम।
भूमि भवन कितने मेरे
कितना बैंक बैलेंस
इसी चाह में हम सभी
करें जीवन भर जंग।
ये मेरा ये तेरा है
इसी का करें विचार
प्रेम से एक न हो सके
बिखर रहे परिवार।
भाई बहन और रिश्तों में
हो रही यहां तकरार
धन संपत्ति के लिए
खिंच जातीं तलवार।
जिस दिन सांसें रुक गईं
माटी हो जाए देह
अपनों का भी आपसे
दूर हो जाए स्नेह।
तेरह दिन तक शोक कर
करके सभी संस्कार
नहीं याद फिर करेंगे
सगे सम्बंधी यार।
घर में फोटो टांग कर
माला से करें श्रंगार
कभी याद जो आ गई
माला बदली यार।
काया जब तेरी नहीं
माया कैसे होय
कर्म ही तेरे नाम के
सदा साथ में होय।
कैसा समय ये आ गया
बांट रहे है मां बाप
कोई कहे मां है मेरी
किसी के हिस्से में बाप।
ईश्वर जप ही है तेरे
जीवन का आधार
इस सागर कीनाव को
प्रभु ही लगावें पार।।
रचियता ---अखिलेश श्रीवास्तव
एडवोकेट जबलपुर
I am Advocate at jabalpur Madhaya Pradesh. I am interested in sahity and culture and also writing k...