Rambriksh Bahadurpuri 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक #Ambedkarnagar poetry#Rambriksh Poetry#Rambriksh kavita#अंधविश्वास और रूढ़िवादी विचारों पर लिखी कविता#जागो अब जीवन लो तराश कविता#सामाजिक कविता 47330 0 Hindi :: हिंदी
शीर्षक-जागो !अब जीवन लो तराश |
जागो अब जीवन लो तराश |
नीली धरती से गगन बीच
मंगल जीवन रेखा लो खींच
कलमयुग कलयुग का इतिहास |
जागो !अब जीवन लो तराश |
धरती गगन समूचे जल को,
नाप लिया जीवन के पल को
शिक्षा से है जीवन विकास |
जागो !अब जीवन लो तराश |
न कृपा श्राप वरदान कोई
न स्वर्ग वैतरणी दान कहीं
सच का करोगे कब एहसास ?
जागो ! अब जीवन लो तराश |
करे न विधवा शुभ कार्य शुरू
यह अपमान क्यों स्वीकार करू
कब ये मिटेगा अंधविश्वास।
जागो !अब जीवन लो तराश |
पत्थर पर दूध गिराते हो
पर किसकी शुधा मिटाते हो?
सत्य का कब होगा आभास?
जागो !अब जीवन लो तराश |
क्या छुआ छूत क्या भेदभाव
नफरत का जलता क्यूं अलाव?
मानवता का हो रहा हास।
जागो !अब जीवन लो तराश |
मन दिल का ईश्वर मात पिता
हैं श्रद्धा ममता के बृक्ष लता
फिर क्यों होता है परिहास।
जागो !अब जीवन लो तराश |
हाथों की रेखा भाग्य नही
है कर्म इष्ट सौभाग्य यही
जग में भर दो जगमग प्रकाश |
जागो !अब जीवन लो तराश |
सद्भाव आचरण प्रेम कृत्य
धरती को बनाते स्वर्ग नित्य
कर लो मन में सुकर्म सुवास |
जागो !अब जीवन लो तराश |
रचनाकार-रामबृक्ष, अम्बेडकरनगर
*************************************
I am Rambriksh Bahadurpuri,from Ambedkar Nagar UP I am a teacher I like to write poem and I wrote ma...