Mithun anuragi 30 Mar 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत MITHUN ANURAGI 58709 0 Hindi :: हिंदी
हे चाँद चाँदनी फैला गगन भर में ,
तू निकल कहीं ना पर निकल उनके आँगन घर में |
दीप्त कर दे बो चेहरा तेरे ही जैसा है ,
है तुझसे भी खूबसूरत तेरे लिए ही संदेसा है |
तू आ धरा पर उनके श्रंगार के लिए
तू तीव्र चमक मेरे प्यार के लिए
हे गुलशन महको मौसम सुगंध कर दो ,
बिछ जाओ राह में ह्रदय आनंद कर दो |
कांटे ना चुभोना उनके नाजुक पेरों में ,
फैला दो खुशबु उनके हर सवेरों में |
तुम महको न महको बहार के लिए
भूल न जाना महकना मेरे प्यार के लिए
हे सावन तू रिमझिम घटाएँ भर ले ,
प्यारी सुहानी हवाएं भर ले
तेरी दमकती है दामिनी उनके बदन की तरह ,
तू भी चंचल है विल्कुल उनके मन की तरह |
तू बरसे न बरस त्यौहार के लिए
पर तू बरस मेरे प्यार के लिए ||
WRITTEN BY
SHAYAR MITHUN ANURAGI