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हर को अपनी स्वीकार करो

MD SHAYEED ALAM 27 Dec 2025 कविताएँ समाजिक कविता मोहम्मद सईद आलम 11737 0 Hindi :: हिंदी

हार को अपनी करो स्वीकार, 
हार का ना करो कभी तिरस्कार। 
हार ही तो जीत की कुंजी है, 
हार ही जीत की पहली सीढ़ी है। 
जब दिल से आए यह पुकार, 
हार गए हो तुम ,अब तुमसे ना होगा यार।
तब उठो फिर से लड़ो तुम, 
खुद से करो शुरू लड़ाई।
खुद को हराने में ,
बहुत मजा आता है मेरे भाई।।

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