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हम कौन थे.....

आदित्य मौर्य'आर्यवंशी' 16 Apr 2023 कविताएँ समाजिक 29811 0 Hindi :: हिंदी

हम कौन थे.....

कहां पर रहे हैं कहा जा रहे हम।
पश्चात सभ्यता में पलते जा रहे हम।।

यहीं के जगत गुरु थे सारे जहां के ।
वेदों की ज्ञान गंगा बहती थी जहां पे।।

अहिंसा के पुजारी थे आज हिंसक बन गए हम।
कहां पर रहे हम कहां जा रहे हम।।

दही- दूध नदी बहती थी अमृत की धारा।
सोने की चिड़िया कहा जाता था देश हमारा।।

देश है स्वतंत्र पर कैसी ये आज़ादी।
देश- जाति , धर्म की हो रही बर्बादी।।

टुकड़ों में टुकड़े-टुकड़े बाटते जा रहे हम।
कहां पर रहे हम कहां जा रहे हम।।

कैसी थी संस्कृति और सभ्यता हमारी ।
शाकाहारी खान पान ना कोई मांसाहारी।।

आज गलत खान-पान में पड़ते जा रहे हम।
कहां पर रहे हम कहां जा रहे हम।।

           काव्य -आदित्य मौर्य 'आर्यवंशी'

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