Pandit Vishal Mishra 30 Jan 2025 कविताएँ देश-प्रेम #हां मैं इस देश का वासी हु # माटी का कर्ज # कसम माटी की # देश भक्ति #देश हित कविता #देश प्रेम 24968 0 Hindi :: हिंदी
हाँ मैं इस देश का वासी हूँ, इस माटी का क़र्ज़ चुकाऊंगा जीने का दम रखता हूँ, तो इस के लिए मरकर भी दिखलाऊंगा ॥ नज़र उठा के देखना, ऐ दुश्मन मेरे देश को मरूँगा मैं जरूर पर तुझे मार कर हीं मरूँगा ॥ कसम मुझे इस माटी की, कुछ ऐसा मैं कर जाऊंगा हाँ मैं इस देश का वासी हूँ, इस माटी का क़र्ज़ चुकाऊंगा ।। पंडित विशाल मिश्रा।