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गुरू च दर्पण माझे-गुरू ज्ञानांचा भांडार

Samir Lande 05 Sep 2023 कविताएँ अन्य Samir Lande, समीर लांडे, मराठी कविता संग्रह समीर लांडे, शिक्षक दीन, techars day 38094 0 Marathi :: मराठी

गुरू च दर्पण माझे ,
गुरू ज्ञानांचा भांडार.
गुरू वीणा विद्यार्थी जणू,
बिन शाखेचा वृष पाहाल.
चढतांना शिखर यशाचा,
असतो गुरूचा च आधार.
गुरू मांगल्याचे माहेर ,
नैत्री आशेचे आहेर .
त्यांची पाझरते माया,
जणू पाण्याची घागर.
आम्ही ओल्या माती समान,
गुरू नवजगाचे शिल्पकार.
गुरुशी नतमस्तक व्हावे,
गुरू दैवा समान...
     शब्द :- समीर लांडे

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