Aarti Goswami 03 Apr 2024 कविताएँ अन्य घर पर कविता, घर की याद कविता 45914 0 Hindi :: हिंदी
"घर की याद"
कितना भी करो आ जाती हैं
घर की याद आ ही जाती हैं
सुबह नहीं तो शाम को आ जाती हैं
घर की याद आ ही जाती हैं
घर की नहीं तो घरवालों की याद आ जाती हैं
सुबह नहीं तो शाम को आ जाती हैं
घर की याद आ ही जाती हैं
घर की नहीं तो घर के खाने की याद आ जाती हैं
सुबह नहीं तो शाम को आ जाती हैं
घर की याद आ ही जाती हैं
घर की नहीं तो घर पर की गई मस्तियों की याद आ जाती हैं
सुबह नहीं तो शाम को आ जाती हैं
घर की याद आ ही जाती हैं
कितना भी करो आ जाती हैं
घर की याद आ ही जाती हैं
~आरती गोस्वामी