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गंगा नदी -तेरी धारा अचल है निरंतर

Shivani singh 20 Aug 2023 कविताएँ अन्य 39041 0 Hindi :: हिंदी

गंगा, तेरी धारा अचल है निरंतर,
पवित्रता की राहों में, बदलता संसार।
हिमाद्रि से उत्कर्षित, तू आती सवार,
वायुमंडल से मिलकर, बरसती वर्षा संग संग।

जीवन की गति तू है, लाती उषा की पहली किरन,
पवित्र तपोवनों से होता संगम तेरा जहां।
काशी के घाटों पर बसी है तेरी धारा अमर,
करते सभी को मोक्ष, जब तेरे पानी में स्नान।

अनगिनत जीवों की है तू माँ,
उनकी आशीषों से भरी हर एक श्रद्धा की ज्यों बोतल तू ही माँ।
सभी दोषों को धो डालता तू जल के रुप में,
पवित्रता की राहों पर, दिलों में बदलता संसार के रुप में।

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