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गूढ परी

Samir Lande 08 Jan 2026 कविताएँ प्यार-महोब्बत गूढ परी, समीर लांडे मराठी कविता, प्रेम, हळवे मन 10288 0 Hindi :: हिंदी

काठावर साडी झुलते, पावलांशी ताल जुळे,
काळी-सावळी कांती तिची, नजरेतच अर्थ खुले.
नाकात नथ चमकते, हास्यात गोडसा सूर,
काळे केस मोकळे, वाऱ्यावर सोडलेले नूर.

साडीच्या पदराआड, श्रद्धेची ओळख होती,
हातात गणपती धरून, शांतता बोलत होती.
माथ्यावर चंद्रकोर जणू, नशिबाची खूण खरी,
साधी वाटते जगाला, पण आतून गूढ परी.

कवी : समीर लांडे 
एक हळव्या मनाचा प्रवाशी

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