akhilesh Shrivastava 06 Dec 2024 कविताएँ समाजिक भारतीय संस्कार में शादियों में फूफा जी की अहम् भूमिका होती है परिवार के माननीय सदस्य होते हैं हमारे जमाने में फूफा जी की हैसियत का वर्णन इस कविता के माध्यम से। प्रस्तुत किया है 43642 0 Hindi :: हिंदी
*कविता*
*फूफा जी का रौब*
हमारी पीढ़ी के फूफा
बड़े मिजाजी होते थे
बात -बात में गुस्सा होकर
अपना आपा खोते थे।।
ससुराल में मुंह फुलाकर
अपना रौब जमाते थे
अपनी बात मनवाने फूफा
जल्दी ही रूठ जाते थे।।
ससुराल में फूफा जी
सज संवर कर आते थे
बालों -मूंछों में खिजाब
और चश्मा काला लगाते थे।।
नीले कुर्ते पर काली बंडी
मूंछों पर ताव जमाते थे
कंधे पर लाल गमछा
हाथ में छाता लाते थे ।।
बालों में सुगंधित तेल
मोंगरा का इत्र लगाते थे
शेर छाप बीड़ी का बैग
हाथ में लेकर आते थे।।
शादी के दिन काली शेरवानी
पहनकर वे सज जाते थे
पगड़ी सर पर पहनकर
फूफा मंद -मंद मुस्काराते थे।।
बारात में सबसे आगे
फूफा ही नजर आते थे
पहन गले में गेंदे की माला
महाराजा वे बन जाते थे।।
बिन फूफा घर के कोई
काज नहीं हो पाते थे
साख जमाकर फूफा जी
मूंछों पर ताव जमाते थे।।
शादी के दस्तूरों में फूफा
रस्में और नियम बताते थे
हर दस्तूर पर लेकर नेग
बंडी में उसे छुपाते थे।
स्वभाव से कड़क फूफा जी
सबके मन को भाते थे
बच्चों के संग बच्चे बनकर
सबको खूब हंसाते थे ।
रचियता ---अखिलेश श्रीवास्तव एडवोकेट जयनगर जबलपुर
I am Advocate at jabalpur Madhaya Pradesh. I am interested in sahity and culture and also writing k...