Chinta netam " mind " 30 Mar 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत 60103 0 Hindi :: हिंदी
* इल्तिजा *
मैं जानता हूं कि तुम मुझे,
एक दिन हमेशा-हमेशा के लिए,
अकेला छोड़ कर चली जाओगी
इंतजार कर रहा है तुम्हारा,
एक बिखरा सा गुलशन,
इस आस में कि तुम उसे,
अपने हाथों से सजाओगी......!
इसलिए ,
तुमसे ऐ मेरे "मन"
बस यही इल्तजा है मेरी
जब तक है संग तुम्हारा,
मिल जाए मुझे इतनी चाहत तेरी...
कि तन्हा जिंदगी से
लड़ते-लड़ते जहां,
थक जाए मेरे हौसलें,
टूट कर बिखर जाए ,
दिल के सारे अरमान,
सपने और इरादे....
संभल-संभल कर,
मैं फिर गिर जाऊं
सुनने वाला कोई ना हो ,
मेरी तड़पती आवाजें ,फरियादें....
वहीं पर मेरे लिए
जीने का सहारा बन जाए
तुम्हारी यादें,तुम्हारी यादें.….....!
चिन्ता नेताम "मन"