अंजली कुमारी 23 Oct 2024 कविताएँ अन्य एक वक्त था 39857 0 Hindi :: हिंदी
एक वक्त था। न चिंता थी,न गम था, एक घर था, एक परिवार था। जीवन का न ज्ञान था, एक आंगन ही पूरा संसार था। मां पिता का हाथ ही, भगवानों का साथ था। कैसे कहूं ? कैसे कहूं ? वह वक्त कितना मूल्यवान था। समय ने मुंह फेर लिया, तब हुआ जीवन का ज्ञान मुझे। अब चिंता और गम भी सहचर हुआ मेरा। न एक घर रहा,न एक परिवार, संसार में मैं ढूंढ रहा था आंगन, वो आंगन भी मुझसे नाराज हुआ। कैसे कहूं ? कैसे कहूं ? वो वक्त कितना महान था। वह वक्त कितना महान था।