Raj Ashok 18 May 2023 कविताएँ देश-प्रेम बलिदान 39156 0 Hindi :: हिंदी
कोई झूठा भ्रम प्रेम का ।
विचलित ना कर दे
मेरे सुहाग को
आज,
अपने राष्ट्र घर्म से
गुथी ये मे अब ये
कैसे सुलझाऊ
मिला है। शोभाग्य,मुझे
बलिदान का क्यो ना ।
मे खुद को बलीदान जाऊ
चर्चित है। ये अमर कहानी
त्याग ,तपस्या और बलिदान की
किसी क्षत्राणी ने, एक
गोरव पल दिया। इतिहास को
रण मे जाने पहले राजा ने
माँगी एक निशानी ।
खड़क उठा के सजा दिया ।
अपन ही सर प्रेम निशानी मे ।
अचंभित, आश्यचकीत् महाराणा
ले निशानी चला रण मे ..........