Anshika Agrawal 30 Mar 2023 कविताएँ देश-प्रेम देशभक्ति कविता, राष्ट्रभक्ति कविता, देश के लिये कविता, मेरा भारत, मेरा देश, 47082 0 Hindi :: हिंदी
ऐ देश मेरे तुझे नमन
दूजा न देश कोई तुझ सा महान,
बहती गोद में जिसके हर पल गंगा यमुना की धार।
कण-कण में यहां भगवान् बसा है,
धरती ने इसकी वेद - पुराण रचा है।
नालंदा तक्षशिला हुए विख्यात विद्या के मंदिर दो,
संस्कारों की इस भूमि में;
विवेकानंद का ज्ञान पाया,
बापू ने अहिंसा का पाठ पढ़ाया ।
ह्रदय में यहां गगन सी विराटता है,
तो विचारो में है समंदर की गहराई।
दादी - नानी की कहानियों से यहां बचपन सजा है,
दादा नाना का ऐनक - डंडा खेल बना है,
फुफ्फा - फुफ्फी का दुलार मिला है,
संयुक्त परिवार का प्यार भला है ,
रिश्तों में अपनेपन का एहसास घुला है।
धर्मों में न है लड़ाई,हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई,
रहते मिलजुल, भाई - भाई ।
जुबां में बंगाल के रसोगुल्लो का स्वाद बसा है,
गुजरात में गरबे - डांडियों का जश्न मना है।
फागुन का रंग उड़ा है,दीवाली का दीप जला है,
खुशियों का मेला लगा है, जन - जन में राम बसा है।
माटी में इसके वीरों का शौर्य रमा है।
लेकर जन्म इस देश में , हुई धन्य बारंबार।
ऐ देश मेरे तुझे नमन ।
ऐ देश मेरे तुझे नमन ।।
- अंशिका अग्रवाल