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दूर कहीं....

Uday singh kushwah 30 Mar 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत 48741 1 5 Hindi :: हिंदी

दूर कहीं...र्पवतों के क्षितिज
पर, ठिठका है चाँद
चाँदनी के लिए,
घोर अंधकार में छिटक रही
चाँदनी नव कोंपलों पर
शनैःशनैः।
पथ की पगडंडियों पर
अंकित है,
पथिक के पदों के निशान
डूंढ़ रही है चाँदनी
चाँद के पद निशान
कहीं अंकित मिलें,
प्रीतम के पाँव  चिन्ह
तारे विस्मित देख मुस्कुरा
रहे शनैःशनैः।
जीव जन्तर 
मधुर गुंजनगान
अलाप रहे
शनैःशनैः।
एक पैर पर
उकढू़ं वैठा उल्लू
देख रहा,चाँद को
देखते चकोर को
एक टक।
रात र्पवतों के क्षितिज
से उतर दरख्तों के क्षितिज
पर अलसाई सी 
भोर के सौर में
पैरों मे अरुणोदय का 
महावर लगाये
चली जा रही है
उस परर 
शनैःशनैः।
-यू.एस.बरी,,,✍️

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Uday singh kushwah
Uday singh kushwah सुपर

3 years ago

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