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दुल्हन

Rambriksh Bahadurpuri 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक #ambedkar Nagar poetry#Rambriksh kavita# Dulhan kavita#Dulhan per kavita 100507 0 Hindi :: हिंदी

कविता-दुल्हन

चिलमन में छिपी बादलों के
चांद का मुखड़ा
मानों नवेली सजी कोई
दूल्हन नवोढ़ा

सोंच कर देखूं गर सूरत
झांक कर चिलमन
खिलता हुआ कमल सा खिले 
चंचल भौरा मन

अधरौष्ठ पंखुड़ियों सी कोमल
लालिमा लेकर
है लग रही अभिसारिका सी
आज रजनी कर

गर्मी की अमिया सी लचकी
दुल्हन की बदन
सूरज ढले खिल जाती चांद
चमक नीलगगन


तारों की बैठी मंडली में
चांदनी शोभा
मानो चमकता है बधू के
कीर्ति की आभा

रचनाकार -रामवृक्ष,अम्बेडकरनगर। 


 

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