RANJIT MAHATO 27 Dec 2024 कविताएँ समाजिक #hindi poetry #poem 42547 0 Hindi :: हिंदी
अब हँसी भी
दिखावे की चीज हो चली है
अब आँसू भी
दिखावे की चीज हो चली है
अब शर्म भी
दिखावे की चीज हो चली है
अब मधुर वाणी भी
दिखावे की चीज हो चली है
अब दान धर्म भी
दिखावे की चीज हो चली है
अब सम्मान देना भी
दिखावे की चीज हो चली है
अब किसी के गम में शामिल होना भी
दिखावे की चीज हो चली है
अब रिश्ते निभाना भी
दिखावे की चीज हो चली है
अब मिलना मिलाना भी
दिखावे की चीज हो चली है
Ranjit Mahato
My name is Ranjit Mahato and I am self-employed by profession. I have a passion for reading and writ...