राकेश 01 Jul 2023 कविताएँ समाजिक दहशत, डर, घबराहट 34263 0 Hindi :: हिंदी
अपने कर्मों को सुधारें, वरना दहशत से मारे जाओगे प्यारे, इस बात को जानते हैं दुनिया में सारे। जो सुकून शांति से जीते हैं, वह लोग नहीं है आपसे न्यारे, बस वह कर्म करते हैं तन मन धन से मानवता के लिए प्यारे। वीर महात्मा शहीद महापुरुष, के आगे दहशत भी हारे, दहशत से बचने के गुरु मंत्र है आसान सारे।