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दाग तनिक न लगने पाये

Manisha Singh 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक Hindi, Poetry, Kavita 47220 0 Hindi :: हिंदी

"अरि ओ"...चल संभाले दामन अपना 

दाग तनिक न लगने पाये 

कुंठाओं से ग्रस्त मनुष्य

तन को तेरे नोच न खाये

गड़ी है आँखे आज अगर,

तुझपे कुछ यूँ रावण सी

तो तू क्यों न सीता बन जाये | 

चल संभाले दामन अपना 

दाग तनिक न लगने पाये | |  

तुझसे से है संसार ये तू नहीं संसार से 

गूँज रही ये धरती फिर क्यों 

तेरी चींख़ पुकार से

नारी है तू अबला है | 

इसको अब झूठलाया जाये 

रक्त पीती "काली" को 

क्यों ने पुनः बुलाया जाये | 

चल बचाकर दामन अपना

दाग तनिक न लगने पाये |  

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