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छू लूं मैं आकाश-अपना बल है एकता हर बाधा कर नाश

संदीप कुमार सिंह 24 Jun 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 38028 0 Hindi :: हिंदी

(दोहा छंद) 
अपनी अपनी सोच है, रखूं नजरिया साफ।
गुण को सदा कबूल कर,करता हूं इंसाफ।।

अपना बल है  एकता, हर बाधा कर नाश।
आगे ही आगे बढूं, छूं लूं    मैं   आकाश।।

व्यर्थ जिरह से मनु बचें, उचित दीजिए साथ।
 हरदम नया जुगार कर,रखें मजबूत हाथ।।
(स्वरचित मौलिक)
संदीप कुमार सिंह✍🏼
जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा)बिहार

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