संदीप कुमार सिंह 08 May 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 23355 0 Hindi :: हिंदी
छाया सबको चाहिए, क्योंकि सभी में कष्ट। ऐसे में छाया मिले, होता विकार नष्ट।। छाया सबको चाहिए,तन्हा सब हैं आज। साथी बनकर साथ चल,सुन्दर होता काज।। छाया सबको चाहिए, जीवन है संग्राम। आपस में रख एकता,नामी होगा नाम।। छाया सबको चाहिए,सबको है संताप। नियति करे मजबूर जब, नहीं चले तब जाप।। छाया सबको चाहिए,सब दिन नहीं समान। शक्ति हीन जब जीव हो,करना मदद सुज्ञान।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....