Atul kumar Gupta 02 May 2024 कविताएँ समाजिक 18588 0 Hindi :: हिंदी
छात्र जीवन..
जीवन के स्वर्णिम दिन थे तुम...
कई ख्वाहिशें पन्नों में अधूरें रह गईं..
खूबसूरत सफऱ और बेहतरीन वक्त थे तुम.
कई हसीन चहेरे पीछे रहे गई..
महफ़िलो की रंग और ह्रदय(जान )थे तुम..
कई यार (दोस्तों ) की यादें रह गई...
एक तरफ़ा प्रेम और गहरा इश्क थे तुम..
तुम्हारे बाद वों एक अफसरा छूट गयी ..