Ajeet 30 Mar 2023 कविताएँ दुःखद 38878 0 Hindi :: हिंदी
रह गई बंद अंधेरो मे
न मिला रोशनी का चिराग कोई/
बुझ गई थी ढिभरी उसकी
क्यो न आया जलाने कोई,
उदास था मन जिसका
वह थी बूढ़ी चन्दा,
रह गई बंद अंधेरो मे
न मिला रोशनी का चिराग कोई/
फेल गई वसुधा पर
बूदों मे घुलकर गीली रात,
घूम रही थी आँधी ऐसी
जिसने बुझाया चन्दा की
ढिभरी को,
रह गई बंद अंधेरो मे
न मिला रोशनी का चिराग कोई/
बुझी ढिभरी को देख
हो गया मन उदास,
उठकर लगी ढूंडने अंधेरों में
ठोकर लग के टूट गई
चन्दा की ढिभरी,
रह गई बंद अंधेरो मे
न मिला रोशनी का चिराग कोई/
लेखक -अजीत