Anilkumar Rathwa (Sameer) 20 Aug 2025 कविताएँ अन्य "बेटी" 14489 0 Hindi :: हिंदी
बेटी वो फूल है, जो खुशबू से आँगन महकाती है, पंखुड़ियों सी कोमल, पर हौसलों में पर्वत दिखाती है। उसकी हँसी से घर गूँज उठता है, उसकी मासूमियत से दिल सुकून पाता है। कभी दादी की आँखों का तारा, कभी पिता की धड़कनों का सहारा। बेटी माँ की परछाई बन जाती है, प्यार में बहन, और दुआओं की छाँव कहलाती है। संस्कार, स्नेह और त्याग की मूरत, हर रिश्ते में ढलती है वो सुरत। कभी लक्ष्मी बन घर में समृद्धि लाती है, कभी सरस्वती बन ज्ञान की रोशनी फैलाती है। कभी दुर्गा बन अन्याय से लड़ती है, कभी राधा बन प्रेम की मिसाल गढ़ती है। बेटी सिर्फ़ बेटी नहीं होती, वो परिवार की जान होती है, ईश्वर के आँगन से उतरी धरती पर सबसे सुंदर पहचान होती है।