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त्याग निद्रा,जाग मुसाफिर

Rambriksh Bahadurpuri 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक #Rambriksh Bahadurpuri Kavita #Rambriksh #Rambriksh Bahadurpuri Ambedkar Nagar #Rambriksh Bahadurpuri Kavita #Nidra per kavita #mushafir per kavita #Ambedkar Nagar poetry 111419 0 Hindi :: हिंदी

कविता -त्याग निद्रा,जाग मुसाफिर। 


बीती रात ,हुआ सवेरा 
पक्षी कुल का, हुआ बसेरा
           कैसे लक्ष्य,तय होगा फिर
           त्याग निद्रा,जाग मुसाफिर,

सोकर कौन? कर पाया क्या?
बैठ करके,खोया ना क्या?
          खोते वक्त, मत जा आखिर, 
          न सोवो उठ,जाग मुसाफिर। 

अपने आप, समझता क्यों न?
होके सबल, सभलता क्यों न ?
          न  बैठ यहां , बनकर शातिर   
          त्याग निद्रा,जाग मुसाफिर। 
    
न बैठ यहां,समय बिताओ
अंतर्मन  न,  यूं  बहलाओ
         समझ सही,उठ गिर गिर फिर
         त्याग निद्रा,जाग मुसाफिर। 

चिंता न कर,दिन लौटेगा
संभल जरा,ना भटकेगा
         तब मिलेगा,अच्छा दिन फिर 
         त्याग निद्रा,जाग मुसाफिर। 

रचनाकार -रामबृक्ष बहादुरपुरी अम्बेडकरनगर यू पी 





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