MD SHAYEED ALAM 08 Jan 2026 कविताएँ समाजिक कविता बचपन मुझे याद आता हाय है 7352 0 Hindi :: हिंदी
बचपन के खेल खिलौने याद आते हैं, बचपन के दोस्त साथी याद आते हैं। बस एक छोटी सी दुनिया थी हमारी, निस्वार्थ बेमतलब थी अपनी यारी। धर्म जाति की न थी कोई दीवार, सभी दोस्तों में था बस बेपनाह प्यार। बिना देखे ना रह पाते थे एक दूजे को, दिन छोटा पड़ जाता था खेल खेलने को। साथ न छोड़ने का वादा करते थे, उम्र भर साथ की कसमें खाते थे। बचपन बीता आई जवानी, बचपन बना बस एक कहानी। अब बस फोन पर बात होती है, सालों साल न मुलाकात होती है। सारे दोस्त व्यस्त रहते हैं, जीवन के तनाव से ग्रस्त रहते हैं। काश कि ऐसा हो पाता, समय का पहिया वापस हो जाता। बचपन फिर से लौट आता।।