Ajeet 30 Mar 2023 कविताएँ दुःखद बादल जी 69584 0 Hindi :: हिंदी
क्यों छुपाते हो मुझे
क्यो सताते हो मुझे ,
अ बादल
क्यों रुलाते हो मुझे /
बिखेरना चाहता हूँ मैं
अपनी किरणों को
क्यों छुपाते हो मुझे
अ बादल
क्यों रुलाते हो मुझे /
बिखर जायेंगी मेरी किरणे
फ़ेल जायेंगी मेरी किरणे ,
इन सूखे पेड़ों मैं
इन रोते खेतो मैं ,
अ बादल
क्यों रुलाते हो मेरी
धरती के फूलों को
वो आस लगायें बेठे होंगे
वो बातें विस्मृत कहते होंगे ,
वो पीले फूल भी गाते होंगे
अब बिखर जाने दो
सूरज की किरणों को ,
क्यों छूपाते हो मुझे
क्यों सताते हो मुझे ,
अ बादल जी
क्यों रुलाते हो मुझे /