संदीप कुमार सिंह 10 Jun 2023 कविताएँ समाजिक मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 32562 0 Hindi :: हिंदी
बच्चे लगें सच्चे सदा,मीठी बोली बोल। भाते सबको हृदय से, प्रीत द्वार के खोल।। बच्चे भविष्य कल बनें,होकर नव उस्ताद। बड़े बड़े वह काम कर,सबको करते शाद।। बच्चे से कर प्यार सब, दे दें सुंदर ज्ञान। ज्ञानी बन वह एक दिन, बनें देश अभिमान।। लगे दिव्य मासूम मन, रहते सरल स्वभाव। मातु पिता के जान हैं, रखिए सदा लगाव।। बच्चे विश्व नेता बने, बने देश की शान। गौरव करे समाज को,सबके हैं वह आन।। बच्चों को दें पथ सही, करिए दिल से प्यार। रहें बढ़ाते चाह को,पावन देय विचार।। बच्चे पर रखिए नजर, पग पग पर सम्हाल। एक दिवस वह साथ दे,देंगें रोटी दाल।। बच्चों का दिल मत दुखा, देते रह सम्मान। सुन उसकी नव बात को, होते प्रसन्न जान।। सुन्दर सुन्दर भेंट कर, बच्चों को दें हर्ष। खुशियों में जब वह रहे, करे अटल उत्कर्ष।। रखें मनोबल को बढ़ा,करिए नहीं निराश। बच्चे तब आगे बढ़े, छू ले तब आकाश।। संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....