संदीप कुमार सिंह 10 Jun 2023 कविताएँ प्यार-महोब्बत मेरी यह कविता समाज हित में है। जिसे पढ़कर पाठक गण काफी लाभान्वित होंगें। 46510 0 Hindi :: हिंदी
हजारों में_लाखों में तेरा जवाब नहीं, बाग में भी ऐसा गुलाब नहीं। क्या रूप है तेरा, रंग सुनहरा, गाल गुलाबी, चाल शराबी। जान_जानू _जानम, आई हो तुम डूब के गुलाबी रंग में। तुम होली की खुशी हो, तुम दिवाली की ज्योति हो। तुम मेरी प्रेम कहानी हो, तुम ही मेरी सपनों की रानी हो। तुम आई हो मेरे लिए, तुम हर रंग से रंगीन हो। तुम्ही तो हो जो मेरा दिल चुराए बैठे हो, चढ़ता हुआ है तेरा कमसिन सवाब। वो दिल ही क्या तेरी चाहत नहीं जिसमें, नीली_नीली आँख है तेरी। तेरी चुनरी में छिपी है खुशी सारी, आई है जवानी सर पे तेरे। तुम मेरी ख्वाब हो, जानेमन तेरे बिन जीना बेकार है। मस्ती भरा है हर अंग, जुल्फें हैं बादल और चेहरा है चांद का। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍️ जिला:_समस्तीपुर(देवड़ा) बिहार
I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me....