Rani Devi 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक 70050 0 Hindi :: हिंदी
आखिर कब तक ?
गुलामी की जंजीरों में जकड़ी औरत
आजादी का देखा न सपना
उसके जुल्मों का खात्मा होगा
आखिर कब तक ?
जन्म लिया तो उसकी कर दी
हत्या या दुख मनाया सबने
खात्मा होगा उसके जुल्मों का
आखिर कब तक ?
हँसते हँसते अपनाया जिनको
उनसे भी रही परायी पीर उसकी
ज़हर देकर या तेल छिड़क कर जलायेंगे
आखिर कब तक ?
समझ सके न पीड़ा उसके दिल की
जिनको अपने जिस्म का खून पिलाया
करेगी सामना सबकी नीच निगाहों का
आखिर कब तक ?
दिया जुल्मों का भंडार उसको
संसार के हर रिश्ते ने
सहनशीलता का मिलेगा इनाम उसको
आखिर कब तक ?
Hindi Lecturer in Government school GSSS Karoa Himachal Pradesh....