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अकेलापन-अकेले नहीं कर पाएगा अपने पूरे शौक

राकेश 13 Aug 2023 कविताएँ समाजिक अकेलापन 32471 2 5 Hindi :: हिंदी

अकेले जीने की ना सोच, धन दौलत शोहरत चाहे हो बहुत, अकेले नहीं कर पाएगा अपने पूरे शौक, कोई तो चाहिए जीवन में दोस्त, अकेले दिल की बात दीवारों से कहेगा सोच, परिवार रिश्तेदार जब नहीं होंगे तेरे दोस्त।

घर में राज होगा तेरा, परंतु राज होगा किस पर तेरा, जब कान मुंह के बावजूद भी तू होगा गूंगा बहरा, सुनने वाला जब नहीं होगा स्वर तेरा, पूरी धरती पर चाहे हो तेरा बसेरा, अकेलापन नहीं रहने देगा तुझे अकेला, मिलजुल कर रहने में हैं, लाभ सिर्फ तेरा।

Comments & Reviews

Sudha Chaudhary
Sudha Chaudhary सही है

2 years ago

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राकेश
राकेश There is a lot of depth in the poem, what a lot has been written

2 years ago

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