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अगर बेटी नहीं होती तो

Uttam mahadu Pawar 02 Dec 2024 कविताएँ बाल-साहित्य बेटी की कविता बेटियों की कविता बेटी को पढ़ाओ कविता बेटी को बचाओ कविता 19813 0 Hindi :: हिंदी

अगर बेटी नहीं होती। तो मां नहीं हीं होती ।और मां नहीं होती। तो संतान नहीं होती।।
अगर बेटी नहीं होती।तो बहन नहीं होती। और बहन नहीं होती।तो रक्षाबंधन के दिन हमें राखी कौन बांधती ।।
अगर बेटी नहीं होती।तो पत्नी नहीं होती। और पत्नी नहीं होती।तो हमारी जिंदगी कौन संवारती ।।
 अगर बेटी नहीं होती ।तो प्रेयसी  नहीं होती ।और प्रेयसी नहीं होती ।तो हमें कौन मिलने आती।।
अगर बेटी नहीं होती। तो हमारी शादी नहीं होती ।और हमारी शादी नहीं होती ।तो जिंदगी उदास होती ।।
अगर बेटी नहीं होती। तो मां पार्वती नहीं होती ।और मां पार्वती नहीं होती। तो इस जगत की उत्पत्ति कैसे होती ।।
अगर बेटी नहीं ।होती तो जरा सोचो। इस जगत का क्या होता ।हमारे रिश्ते का क्या होता ।किसी को मां नहीं मिलती ।किसी को बहन नहीं मिलती ।किसी को पत्नी नहीं मिलती। किसी को प्रेयसी नहीं मिलती ।और किसी को मां पार्वती नहीं मिलती। इसलिए मैं कहता हूं बेटी को बचाओ ।बेटी को पैदा करो। बेटी को जीने दो ।और उसे पढ़ने दो। यही नियति का नियम है।।

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