Trilok Chand Jain 30 Mar 2023 कविताएँ देश-प्रेम Desh bhakti 39630 0 Hindi :: हिंदी
आग तो भीतर में होनी ही चाहिए मातृभूमि के गुरूर की जोश और जुनून की उसमें ही नहीं, तुझमें भी तुझमें ही नहीं, मुझमें भी ये ही तो आग है जो स्वाभिमान की तपन देती है देशभक्ति की अगन देती है झुकने नहीं देती, रुकने नहीं देती टूटने नहीं देती, मिटने नहीं देती इतिहास गवाह है, इस आग का फन कुचला है, आतताई नाग का वो पन्नाधाय की, सुत बलिदानी देख लो वो राणा प्रताप की, अमर कहानी देख लो वो सुखदेव, राजगुरु और भगत सिंह की फांसी नन्हे बालक संग रण में, लड़ने वाली रानी झांसी जलाके रखी भीतर में, इन्होंने देशभक्ति की लौ तभी तो आदर्श हैं आज, स्थान है अनेक दिलों यह आग हमको भी जलानी है अपनी भी कुछ लिखनी कहानी है शहीद नहीं हो सकते तो, विश्वास तो भीतर भरना है मातृभूमि की संस्कृति की, ताउम्र ही रक्षा करना है
Working Editor of Swadhyay Shiksha Magazine. Jainism teacher. Running Ph.D in Jain Jeevan Paddhat...