Sudha Chaudhary 03 Jun 2023 कविताएँ अन्य 32548 0 Hindi :: हिंदी
सिमटने दो क्षण को, ये तुम्हारे कण में है। रोक लोगे तुम इसे, ये तुम्हारे कर में है। तुम्हारे नेह का कोमल ठिकाना है सुलभ। जो तुम्हारे आश में बैठा तुम्हारे घर में है। किस बात की चिंता किस बात की दुविधा तुम्हें जब तुम्हारे पथ का साथी, अब तुम्हारे रग में है। सुधा चौधरी बस्ती